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अरे यार! समय नहीं है


ये है क्या,
जो किसी के पास नहीं है,
पास होते हुए भी यह,
पता नहीं क्यों नहीं है
हमेशा जिसे देखो तब,
अरे यार समय नही है ।

यदि समय नही है
तो कैसे कर लेते हो कुछ,
इस चीज़ के लिए नहीं तो
किसके लिए बहुत कुछ,
नही बताया उसने क्योंकि
अरे यार समय नहीं है।

समय भी कैसा है
ये दूसरों के लिए तो है,
जिनसे है मात्र दिखावा,
ऐसा नहीं कि और नहीं है
बात अपनों की हो तो,
अरे यार समय नहीं है।

है किसके पास
कहीं ऐसा तो नही है
कि इसका वजूद ही नहीं,
लेकिन ऐसा तो नहीं है,
ढूंढ़ेंगे हम इसे लेकिन,
अरे यार समय नहीं है।

 चलो ठीक है,
मान लेते हैं कि नहीं है,
कुछ तुम निकालो कुछ मैं,
हां, ये बिल्कुल सही है
इतना भी न हुआ क्योंकि
अरे यार समय नहीं है।

ये समय है
बस इसे पहचान लो तुम
निकालोगे जरूर मेरे लिए
थोड़ा जल्दी, जान तो तुम
कहीं मैं भी न बोल दूँ कि
अरे यार समय नहीं है।

              -पंकज 'नयन' गौतम

Comments

  1. भाई ज़िन्दगी का कड़वा सच लिखा है तुमने
    बहुत बढ़िया
    ऐसे ही अपने विचारों को हम तक पहुंचाते रहो

    ReplyDelete
    Replies
    1. बिल्कुल भाई आप यूं ही पढ़ते रहोगे तो हम अपने विचार व्यक्त करते रहेंगे।

      Delete
    2. This comment has been removed by the author.

      Delete
  2. Replies
    1. सही गुरुदेव??

      बहुत बहुत धन्यवाद भ्राते❤❤

      Delete
  3. 👌👌
    =बहुत सही गुरु लिखा है आपने 👍👍

    ReplyDelete
    Replies
    1. इसका मतलब बहुत सही पढ़ा है गुरु आपने😊

      Delete

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ज़िन्दगी

करना पड़ता है वो भी, जो नहीं चाहते हम कभी। बस इसी मज़बूरी का तो नाम ज़िन्दगी है। सफल होना मक़सद नही,असफल भी होते हैं हम, बस इसके लिए किया गया काम ज़िन्दगी है। अपना गांव छोड़े, घर वार छोड़े, पर याद संजोए हुए हैं,,, अब फिर लौट आने का इंतजाम ज़िन्दगी है। रख कर दिमाग अपने घर में, निकल जाते थे दोस्तों के साथ, बस वही 'अनमोल' सुबह और शाम ज़िन्दगी है। हंसना, रोना, खाना ,सोना सबमें कुछ 'अलग' ही मज़ा था । घर में थे तो इस 'सफर' के बारे में सोचना भी सज़ा था। बस इसी पल तक हम अनजान थे 'इस' ज़िन्दगी से, 'वो' सुकून से किया गया 'आराम' ज़िन्दगी है। अब निकले हैं अनजाने सफर पर, कुछ तय करके पैमाने, ये 'करना' है और ये 'नहीं करना' , लगे खुद को समझाने , जो 'किये'  और जो 'नहीं किये' सब बन गए ज़िन्दगी के 'किस्से'; अब जो भी हम हासिल करेंगे, वही मुक़ाम ज़िन्दगी है।

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We know that.....

I know that I know me but you don't know me, And you know that you know me But I don't know me. Now I know that I know me Better than you. You know me better than me. I know you better than you But you know that You know yourself better than me. Conclusion-: We know each other , Better than ourselves. Welcome!